motherhood

माँ

तेरी गोद में खेलते खेलते,
न जाने कब मैं बड़ी हुई।
तेरा हाँथ पकड़ पकड़,
न जाने कब पैरों पे खड़ी हुई।

तूने अपने आँचल की छाव से,
दूर रखा मुझे ज़माने के घाव से।
माँ तू एक छोटे से परिंदे की राह का,
एक बड़ा आसमान है।

भगवन का दिया सबसे बड़ा तोहफ़ा है तू,
दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत चेहरा है तू।

जब भी आँखों में मेरे आंसू आया,
तो तू भी रो देती है।
जब भी मेरी तबियत ख़राब हुई,
तू रात रात भर जगती है।

जिसकी कोई शर्त नहीं
सिर्फ तेरा ही तो प्यार है।
जब जब छुआ तेरे पैर,
मैंने घूमा चारों धाम है।

माँ एक मीठी बोल है,
इसका न कोई मोल है।

– शिवानी पाल।
Shivani Pal
Shivani Pal
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